Friday, February 7, 2020

" मेरी कविताएँ ज्यादातर समाज मे हो रहे बदलाव पर केन्द्रित है" : स्वस्ति रानी




मेरी कविताएँ ज्यादातर समाज मे हो रहे बदलाव पर केन्द्रित है" : स्वस्ति रानी 


करीब डेढ़-दो वर्षो पहले बचपन में मुजफ्फरपुर, बिहार के जिस स्कूल में मैं पढता था उसके १९८८ बैच के व्हाट्सप्प ग्रुप का सदस्य बना. हमारे स्कूल का नाम था 'विद्या विहार स्कूल' जिससे हमलोगो ने १९८८ में  मैट्रिक की परीक्षा पास की थी. करीब तीस वर्षो के बाद बहुत सारे मित्रो से दुबारा संपर्क स्थापित हुआ. ग्रुप का सदस्य बनने के कुछ दिनों के बाद ही एक फेसबुक पेज बनाने में मैं सहायक हुआ. कविता-कहानी-साहित्य में रूचि होने के कारण कई अन्य मित्रो को भी कवितायेँ आदि लिखने के लिए मैं प्रोत्साहित करता रहा. 

आश्चर्यजनक रूप से कई मित्रो ने अच्छी कविताये पेश करनी शुरू की जिसे फेसबुक पेज पर हमलोग शेयर करते रहे. आज आपके सामने  पेश है एक साक्षात्कार उसी ग्रुप की एक सदस्य--स्वस्ति रानी से-- जिन्होंने पिछले कुछ समय से ही कविता लिखना शुरू किया और कई समसामयिक, वयक्तिगत मनोभाओंआदि को जोड़कर वो निरंतर कविताये लिखती रहती हैं. आइये पढ़ेंएक कवियित्री के रूप में स्वस्ति रानी का यह प्रथम साक्षात्कार।  यह साक्षात्कार व्हाट्सप्प के माध्यम से २९ जनवरी- ५ फ़रवरी २०२० के बीच संपन्न किया गया. स्वस्ति रानी की कविताये पढ़ने के लिए आप इस पेज से जुड़ सकते हैं: https://www.facebook.com/1988VidyaViharMuzaffarpur/         

              

कुमार विक्रम : सितंबर २०१८ में आपकी एक कवितादोस्ती के मायनेविद्या विहार के एफ बी पेज पर हमने प्रकाशित की? क्या सचमुच वह आपकी पहली कविता थी? कुछ उस प्रथम कविता के रचना के बारे में बताएँ।

स्वस्ति रानीमेरी सोच मे कुछ अलग करने की चाहत हमेशा से रही। मेरे पिता डाक्टर थे। उनके कार्य और समाज सेवा को देख मैं हमेशा कुछ अलग करने की सोचती रहती। शादी हुई, घर परिवार के साथ कदम से कदम मिला कर चलते काफी वक्त बीत गया। लेकिन मन मे जिज्ञासा बनी रही। तीस बरसों बाद पुराने मित्रों से, जो स्कूल मे साथ पढ़ते थे, फेसबुक के द्वारा जुड़ने का मौका मिला। हमलोगो का एक ग्रुप बन गया। हम सभी मिलने को बेताब थे। उसी क्रम मे पता चला, मेरे एक मित्र कवि हैं, मैं बहुत खुश हुई  मेरे जीवन को एक नया आयाम मिल गया।
उनके सानिध्य मे रह कर दोस्तों के प्रोत्साहन से एक पैगाम दोस्तों के लिए लिखी, जो मेरी पहली कविता थी। फिर क्या था मेरी लेखनी चल पड़ी, मन मे उठते भावों को व्यक्त करने का मौका मिल गया।

कविता लिखने मे मेरे पति का भी भरपूर सहयोग रहा। जब उन्होंने मेरी पहली कविता देखी और पढ़ी, फिर क्या था, हर रोज उनका पूछना कि आज कुछ लिखा या नहीं। शायद सभी के सहयोग का ही परिणाम है कि मैं अपने मनोभावो को पृष्ठभूमि पर उतार पायी

कु. वि कविता के लिए विषय कैसे मन में आते हैं और कैसे उन्हें कविता के रूप में आप ढालती हैं?

स्वस्ति: मेरी कविता ज्यादातर समाज मे हो रहे बदलाव पर केन्द्रित है।समाज मे हो रहे कुरीतियों को अपने मनोभावो द्वारा उकेरने की कोशिश रही है।और अच्छे सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है।जब भी खाली वक्त मिलता है सोचे गये विषय पर गहन चिन्तन करती हूँ। फिर कविता लिखती हूँ।

कु. वि: आपके बचपन में जो सामाजिक ताना बाना था और अब जो बदलाव रहे हैं, उनके बारे में कुछ कहना चाहेंगी?

स्वस्तिहमलोगों के बचपन और आज के वक्त में काफी बदलाव आया है। लड़के-लड़कियों का साथ साथ पढ़ना, बातें करना,एक दूसरे को हर प्रकार की मदद करना आसान हो गया है। पहले इन पहलुओं पर कड़ी नजर रखी जाती थी।अब माता पिता और समाज के लोगों में काफी बदलाव आया है।पर अभी भी बहुत से क्षेत्रों में नजर ओर नजरिया दोनों ही बदलने की जरूरत है।

कु. वि: कविताएँ पढ़ती भी हैं?

स्वस्तिशूरू के दिनों में कविताओं के प्रति मेरी  रूचि नहीं के बराबर थी पर इधर के कुछ बरसों में कविताएं पढ़ना और कविताओं के विडियोज देखना काफी पसंद करने लगी हूं

कु. वि: अच्छी बात है। आपको अपनी कौन कौन सी कविताएँ सबसे अधिक पसंद हैं?

स्वस्तिकविताएं तो मुझे सभी पसंद हैं। सबसे अधिक पसंद आने वाली कविता जैसा कि आपने पूछा है--भ्रूण हत्या, ईश्वर की रचना, तुझे नमन, और पर्यावरण पर लिखी कविता है।



कु. वि: कविता के बारे में कहते हैं कि वो स्मृतियों का ताना बाना है। आप इसे किस रूप में लेती हैं?

स्वस्तिहमारे आसपास जो भी अच्छी या बुरी घटनाएं होती हैं, वह कहीं कहीं व्यक्ति के दिलो-दिमाग पर अपना प्रभाव जरुर छोड़ जाती है। उन्हीं को शब्दों में पिरो कर कविता के माध्यम से हम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। तो यह बिल्कुल सच है कि वो स्मृतियों का ताना-बाना ही है।

कु. वि: क्या कभी कोई कहानी लिखने की चेष्टा की है? या आपके पास कोई कहानी है जिसे आप लिखना चाहती हैं। क्या इसके बारे में कुछ बताना चाहेंगी?

स्वस्तिअभी तक तो मैंने कोई कहानी नहीं लिखी पर मेरी जिज्ञासा है कि मैं कहानी के माध्यम से भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना पाऊं।

कु. वि: आपकी पहली कहानी की प्रतिक्षा रहेगी। अब तक आपकी कितनी कविताएँ हो चुकी हैं?

स्वस्तिउत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! अब तक की लिखी गईं 23 कविताएं फेसबुक पर हैं।

कु. वि: कविताओं की संख्या अच्छी हो गई हैं जो कि शायद पिछले एक-डेढ साल की ही उपलब्धि है। क्या आपने शुरूआत में ऐसा सोचा था कि कविताएँ आप नियमित रूप से लिखने लगेंगी। अभी आप क्या लिख रही हैं?

स्वस्तिमेरी सारी कविताएं इन्हीं डेढ़ साल में लिखी गई है। सोची तो नहीं थी कि मैं इतनी सारी कविताएं लिख पाऊंगी पर जब मैं कविता लिखने लगी मुझे काफी अच्छा लगने लगा।मन में कुछ कुछ विचार हर वक्त चलते रहते

जब एक के बाद एक कविताएं पूरी लिख लेती थी तो सम्पूर्ण आनन्द की अनुभूति होती थी और मैं आगे बढ़ती गई अभी मैं एक कविता लिख रहीं हूं।जो जल्द ही आप सब को पढ़ने को मिलेगी फिर मैं अपना ध्यान कहानी पर केन्द्रित करुंगी

कु. वि: आप पिछले दिनों बहुत बड़े व्यक्तिगत आघात से गुज़री हैं। आपकी आख़िरी कविता जो आपने काफ़ी समय बाद हम पाठकों के साथ साझा किया उसमें वे सारे अनमोल भावनाएँ आपने व्यक्त की हैं। ऐसा लगता है कि आने वाले समय में इन भावनाओं को उकेरती हम कुछ अन्य रचनाओं से रूबरू होंगे। आप कुछ इसपर कहना चाहेंगी?
स्वस्तिउस व्यक्तिगत आघात से बाहर निकलना शायद इस जन्म में मुमकिन नहीं हो पायेगा।उन आघातों का वर्णन करने के लिए कोई शब्द ही नहीं बने हैं। कविता लिखना मुझे पसंद था तो कविता पढ़ना हमारे प्राणप्रिय की पसंद थी। इसलिए कोशिश जरूर रहेगी अपनी भावनाओं को पाठकों तक पहुंचाने की।

कु. वि: सही कह रही हैं आप। आख़िर में कुछ अपने बच्चों के बारे में बताएँ कि वे क्या कर रहे हैं और वो आपकी कविताओं को कैसे लेते हैं?

स्वस्तिमेरे बच्चे बालिग हैं और वो अपने अपने क्षेत्र में अच्छा कर रहे हैं।वो भी कविताएं पढ़ते हैं और ज्यादा से ज्यादा अच्छी कविताएं लिखने की ओर प्रेरित करते हैं।

कु. विस्वस्ति जी,  बहुत बहुत धन्यवाद!! आशा है कि आप अपनी नई नई रचनाएँ हम पाठकों के समक्ष लाती रहेगी। यह भी आशा है कि कभी आप अपना कविता संग्रह भी लेकर आएँगी। फिर से धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ!
स्वस्तिजरूर, पर थोड़ा वक्त लग सकता है 

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