Friday, June 30, 2017

कविता की विदाई





कविता की विदाई 

मैं ख़राब से भी खराबतम कविता लिखना चाहता हूँ 
पूरी कविता तो यूँ भी कभी किसी को पसंद आई हो
अगर कुछ शब्दकुछ बिंबकही कोई भाव
कभी किसी को बरबस ठीक लग गए हों
आज ही उन्हें वापिस लेता हूँ 
कूड़ेदान में उन्हें घुमाकर फेंकता हूँ 
कविताओं  बिम्बों का बेहतर होना 
ख़राब बदसूरत समय की निशानी है
मैं चमकदार बिम्बों के गफ़लत भरी दुनिया से निकल
भीड़ में छुपे मनुष्य से हाथ मिलाना चाहता हूँ 
जहाँ अच्छी असरदार मार्मिक कविता 
हमेशा के लिए विदा ले ले।  

-कुमार विक्रम