Sunday, July 31, 2016

दरिद्रनारायण की सेवा






दरिद्रनारायण की सेवा



राजा को अवगुण पसंद नहीं थे
उसने अपने पास सिर्फ गुणों को रख कर
सारे अवगुण अपने वज़ीरों में बाँट दिए 
वज़ीर ठहरे वज़ीर
उन्होंने उन अवगुणों से
बचे-खुचे गुण छांट कर
अपने पास रख लिए
और बाकी सारे अवगुण
अपने अफ़सरान में बाँट दिए
अफ़सरान ठहरे अफ़सरान
उन्होंने अवगुणों पर नक़ली गुण का पानी चढ़ाकर
चमकते गुणों के हार
अपने गले में डाल लिए
और बाकी सारे अवगुण जनता में बाँट दिए
इस तरह सर्वगुणसम्पन्न राजा के अधीन
दरिद्रनारायण के राज की स्थापना हो पाई
जिनकी सेवा
राजा, उसके वज़ीर और अफ़सरान का
परम कर्त्तव्य बन पड़ा
और उस सेवा को भी
अपने गुणों में शामिल कर लिया

--कुमार विक्रम

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