Tuesday, October 28, 2014

एक शीर्षक विहीन कविता



 एक शीर्षक विहीन कविता 


१.
मृत्यू उपरांत भी 
जीने की आस रहती है
अपनों के स्मृतियों के कोने में 
एक जगह पा लेने की चाह
स्मृतियों के परे जाकर भी
रहती है.
२.
जीवन में भी
मृत्यू की याद सताती रहती है
जीवन पूरी तरह जी लें
कदम कदम पर
अपने संग चलते साये को देख
मन में यह भाव बहता रहता है.
३.
लगता है जीवन और मृत्यू
बिछड़ी हुए बहनें हैं
जो कभी मिलती तो नहीं
लेकिन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर
एक दूसरे की नैया
पार कराती रहती हैं

कुमार विक्रम