Friday, October 24, 2014

नयी प्रार्थनाएं




नयी प्रार्थनाएं 


पक्षियों की तरह उड़ना नहीं 
मछलियों की तरह तैरना नहीं 
चीते की तरह तेज दौड़ना नहीं 
हाथी की तरह बलशाली नहीं 
कुत्ते की तरह वफ़ादार नहीं 
गधे की तरह खटना नहीं 
महापुरुषों की तरह अजर-अमर होना नहीं 
इंसानों को अब अपने सपने 
कुछ और बड़े, कुछ और वृहत बुनने होंगे 
अपनी प्रार्थनांएँ कुछ और विकट गढ़ने होंगे      
जैसे इन्सानी खून को रिसते देख
उसे टपकने से पहले 
रोक देने की संवेदना और उबाल की दरकार 
बीमार का हाल-चाल पूछने का सलीक़ा 
बूढ़े-बुजूर्ग को सड़क पार कराने की कला
बच्चे को कंधे पर बिठा 
दुनियाँ की सैर कराने का विज्ञान 
झूठ को झूठ 
और सत्य को सत्य 
कहने की हिम्मत और ज़रूरत।


कुमार विक्रम

No comments:

Post a Comment

To Father: A Poem

To Father Sometimes you should pick up poetry And read them aloud Feel the sound of words Search for their varied meanings In dictionaries a...