Saturday, August 23, 2014

वो जो उठकर चला गया (यू. आर. अनंतमूर्ति के निधन पर)

३ अक्टूबर २००६ को फ़्रंकफ़र्ट बुक फेयर में मीडिया से मुख़ातिब यू. आर. अनंतमूर्ति. 
नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित भारत-अतिथि देश के अवसर पर इस कार्यक्रम का संयोजक मैं ही था



वो जो उठकर चला गया (यू. आर. अनंतमूर्ति के निधन पर)


जाने वाला इस देश से ही नहीं 
दुनिया से चला गया 
बैठे-बैठे, या लेटे-लेटे
या फिर यूँ ही
चहलकदमी करते हुए
चाय पीते हुए
वह चला गया
पहली बार बिना यह बोले
कि 'बस अभी आया'
उसके पीछे पीछे हम नहीं जा सकते
वह शायद ऐसी जगह गया है
जहाँ उसके पहुचने से
उसका वहां के लिए उठकर
जाना ज़्यादा ज़रूरी होता है
तुम ख़ुशी मनाओ या शोक
अब कोई फर्क नहीं पड़ता उसे
ना ही तुम उसके बिताये हुए पलों को
कर सकते खारिज़
और न ही उसके उठकर जाने को.

कुमार विक्रम