Tuesday, July 1, 2014

जिन्हे खुद पर विश्वास नहीं होता वो नास्तिक बन जाते हैं

जिन्हे खुद पर विश्वास नहीं होता वो नास्तिक बन जाते हैं

'The Light Within', photo by
Mateusz Staniewski
Courtesy: http://static.pechakucha.org
तुम तो किसी भगवान
अथवा शैतान की प्रतिमा को गिराकर ही
अपने दायित्व से मुक्त हो जाना चाहते हो
आश्चर्य नहीं 
हर वर्ष रावण-दहन की
औपचारिक मुखौटी संस्कृति के 
इतने कायल हो तुम कि 
अपने आस-पास पल-पल बनते रावण 
तुमसे गलबहियां करता  
तुम्हारे साथ बर्गर खाता हुआ 
आदि तुम्हे छू तक नहीं जाता   
सचमुच कभी कभी ऐसा महसूस होता है 
कि जिन्हे खुद पर विश्वास नहीं होता है,
वही शायद नास्तिक बन जाते हैं 
क्योंकि कई बार देखा है 
मंदिरों-मस्जिदों के पास नहीं फटकने वाले 
बाहर भीखमंगों के साथ बैठ जाते हैं
जैसे किसी राजनीतिक पार्टी की मुखालफत करने वाले 
उसके पोस्टर लगाने की ठेकेदारी उठा लेते हैं
शायद आस्था का प्रश्न इतना भी विकट नहीं 
मानो तो पत्थर वरना मनुष्य
और सच कहूँ तो अखबारों में
मैंने भी पढ़ी ही वो ख़बरें कि 
समुद्र की लहरों का सामना
करने की कामना करने वाले 
होटल की स्विमिंग पूल में ही
डूब कर खप गए
इससे तो शायद अच्छा है कि 
कुछ अगरबत्तियों की खुशबु ही 
मंदिरों-मस्जिदों में बिखेर दी जाए
ताकि अगरबत्ती बनाने वालों और 
खुशबुओं की चाह रखने वालों के बीच
कुछ तो रिश्ता कायम हो जाए. 

  --कुमार विक्रम

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