Friday, May 30, 2014

वैधानिक चेतावनी

 

 

 

 

वैधानिक चेतावनी 

बारिश में सब एक साथ भींग रहे थे
अलग-अलग
जैसे मैं भींग रहा था
शायद बिलकुल उसी तरह मेरे बगल में खङा
वो ओवरकोट वाला व्यक्ति
जिसके हाथ में एक
Image Courtesy: http://drawception.com
वाटरप्रूफ ब्रीफकेस था
नहीं भीग रहा था
भींग तो मैं रहा था ज़रूर
पर साथ ही साथ मैंने ठान रखी थी
बचपन की बारिश को स्मृतियों में नहीं लाने की
यह खेल भी बोरिंग हो चला था
कि बारिश हुई नहीं
कि चले पङे कागज़ की नांव पर बैठने को
मैं तो बस यह सोच रहा था
कि बरसात की बूंदे
कैसे एक आसमान से ही आकर
अलग अलग तरीकों से भीगों देती हैं सबको
और कईयों को तो बारिश में भी 
सिगरेट सुलगाते देखा है मैंने 
मानो सुलगती हुई सिगरेट 
बारिश को चिंगारी का वज़ूद बताती हो
शायद अपनी चमकीली आँखों से
यह बताते हुए 
कि जब धार धार बारिश हो
तो पीछे की नहीं 
आगे की सोंच.

कुमार विक्रम