Wednesday, November 27, 2013

संवाद की प्रतीक्षा में एक बाचाल प्रार्थना

 

 


A Work of Art Titled ‘Noise Pollution’ at 
Kala Ghoda Festival, Mumbai, 2013
Image Courtesy: http://life.paperblog.com

संवाद की प्रतीक्षा में एक बाचाल प्रार्थना


अभी तुम शायद और बोलोगे
पानी पीने के बाद,
एक लम्बी सांस लेने के बाद
कुछ और उपदेश या ज़हर उगलोगे.

मुझे पसंद है तुम्हारा बोलना
तुम्हारे उपदेशरूपी ज़हर
ज़हररूपी उपदेश
और तुम्हारा दूसरों का हर रहस्य खोलना.

यह करता है मुझे आश्वस्त
कि मनुष्य के मनुष्य होने के सारे दावे
अभी भी हैं पूरे खोखले या आधे
दूसरों के पापों को खोजने में अभ्यस्त

पर चीख-चिल्लाकर तुम पहुँच नहीं सकते
खुद तक भी
दूसरों के दरम्यान क्या जगह बनाओगे
बस लौट आओ अपने मन में यूँ हीं बकते बकते

देखो अभी अभी मैं भी लौटा हूँ
कुछ बक कर, कुछ फेंक कर
पर  मेरे शब्द ही अब मुझे नकारते हैं रह-रहकर
सच कहूँ, अपने सामने हीं मैं बहुत बड़ा छोटा हूँ

या फिर हूँ खुद का समकक्ष

और जब तुम लौट जाओगे अपने पास
मैं भी खु़द-ब-खु़द
आ जाऊंगा तुम्हारे ही इर्द-गिर्द
कुछ गंभीर शब्दों के मतलब ढूंढने ख़ास

और फिर मैं और तुम
इस बाचाल समय में
करेंगे कुछ संवाद
ज़रा होकर गुम-सुम

---कुमार विक्रम

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